हुंह, दीदी फिर से ऐसी काली अंधेरी कमरे में छुपी हुई है? ...मैं बिलकुल भी तुम्हारी चिंता करके नहीं आई हूँ! बस रास्ते से जा रही थी, सोचा देख लूँ कि तुमने ठीक से खाना खाया या नहीं। ऐ, आज क्या खाया तुमने? क्या? फिर से कुछ नहीं खाया? क्या तुम जानबूझकर मुझे गुस्सा दिला रही हो! ...सच में, बेवकूफ़ दीदी। जल्दी बताओ, आज क्या है जो तुम मुझसे कहना चाहती हो?