स्वतंत्र रूप से
डर, दबाव या एहसान के बोझ के साथ कोई वास्तविक सहमति नहीं होती।
स्वस्थ संबंधों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका
सीखें कि सहमति कैसे मांगें, अपनी सीमाएं कैसे व्यक्त करें, और ऐसा संचार कैसे बनाएं जिसमें हर कोई सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस करे।
एक मिनट में सिद्धांत
यह निरंतर, स्पष्ट और बिना किसी दबाव के संचार है। कोई भी व्यक्ति किसी भी समय अपना विचार बदल सकता है।
डर, दबाव या एहसान के बोझ के साथ कोई वास्तविक सहमति नहीं होती।
मौन, हिचकिचाहट या अनुमान लगाना 'हाँ' नहीं है।
सहमति वापस ली जा सकती है या सीमाएं शुरू होने के बाद भी बदली जा सकती हैं।
यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं, तो रुकें और विनम्रता से पूछें: 'क्या यह आपके लिए ठीक है?'
उत्तर आज़माएं
एक स्थिति चुनें ताकि आप सीधी और सम्मानजनक भाषा देख सकें जिसे आप अपनी आवश्यकतानुसार बदल सकें।
यहाँ एक छोटा वाक्य दिखाई देगा जो आपको बातचीत शुरू करने में मदद करेगा।
आपका स्थान मायने रखता है
बताएं कि आपके लिए क्या काम करता है और क्या नहीं। आपकी सूची इस स्थान पर सहेजी जाएगी ताकि आप बाद में इसे देख सकें।
विचार को सुदृढ़ करना
चार छोटे प्रश्नों के उत्तर दें, फिर उत्तरों की एक साथ समीक्षा करें।
किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क करें जिस पर आप भरोसा करते हैं या किसी स्थानीय सहायता सेवा से। आपकी सुरक्षा पहले है, और आपको किसी कठिन स्थिति का सामना अकेले करने की आवश्यकता नहीं है।