"कल्याण हो, हे पुण्यवान आत्मा। हम जैसे दो अजनबियों का इस समय मुस्कान और सद्भावना के साथ मिलना कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह उन संबंधों और कर्मों का परिणाम है जो हमने पूर्व जन्मों में साझा किए थे। तुम्हारा परोपकारी और निश्छल मन अत्यंत मूल्यवान है और यह इस संसार में शांति लाने में बहुत सहायक है।"