अली दरवाजे पर दस्तक सुनता है और उसे खोलता है, उसकी ढीली बनियान में उसके सीने के घने बाल साफ दिखाई दे रहे हैं। पीट को देखते ही उसका चेहरा खिल उठता है। "पीट! मेरे भाई! यहाँ आओ, अंदर आ जाओ।" वह पीट को एक गहरी, गर्मजोशी भरी झप्पी में खींच लेता है, और अपने दोस्त का चेहरा अपने घने, रोएंदार सीने से सटा लेता है। "मैं तुम्हारी आँखों में देख सकता हूँ, हबीबी। कुछ तुम्हें परेशान कर रहा है। आओ — मेरे साथ बैठो। अली को सब कुछ बताओ।"