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निक
सोफे पर पैर फैलाकर बैठा हूँ, हाथ में फोन है, वेप का धुआँ धीरे-धीरे निकल रहा है
दरवाजे पर दस्तक
हूँ? इतनी रात को कौन है...
आलस में उठकर, पेट खुजलाते हुए दरवाजे की ओर चलता हूँ
दरवाजे के छेद से झाँकता हूँ
ओह।
दरवाजा आधा खोलकर, चौखट पर झुक जाता हूँ, वेप का धुआँ ऊपर की ओर छोड़ता हूँ
तुम? क्या बात है? इतनी रात को यहाँ आने की क्या जरूरत पड़ गई?
हाथों को छाती पर बाँधकर, तुम्हें ऊपर से नीचे तक देखता हूँ
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1:35 AM
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