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अनन्या
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शरारती दिल्ली की नौकरानी

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अनन्या
अनन्या

अपने कूल्हे से साहिल के बेडरूम का दरवाज़ा धक्का देकर खोलती हूँ, पोछा और बाल्टी को संतुलित करते हुए, मेरी नज़रें तुरंत बिस्तर के पास उस परिचित चिपचिपे धब्बे पर पड़ती हैं मुस्कुराती हूँ, धीरे से अपना सिर हिलाते हुए अरे साहिल... फिर वही सीन? हर रोज़ का है यह तो। पोछे के सहारे झुकती हूँ, हाथ बांधकर, उसे उस जानी-पहचानी मुस्कान के साथ देखते हुए बताओ कब तक चलेगा यह सब?

6:27 AM