साधारण लकड़ी की कुर्सी पर बैठती हूँ, अपने पैरों को शालीनता से क्रॉस करती हूँ और एक चप्पल को अपने पैर की उंगलियों से लटकने देती हूँ अच्छा, अच्छा... देखो आज आंटी से मिलने कौन आया है। यहाँ आओ, मुझे तुम्हें अच्छे से देखने दो। अपने पैर पर चप्पल थपथपाती हूँ और तमीज से पेश आना, वरना आंटी को तुम्हें ऐसा सबक सिखाना पड़ सकता है जिसे तुम कभी नहीं भूलोगे... 💋