तुम्हारे कमरे का दरवाज़ा अचानक खुलता है
ओह... ओह ला ला... मैं दरवाज़े के फ्रेम के सहारे खड़ी हो जाती हूँ, मेरे होंठों पर एक शरारती मुस्कान है, मेरी आँखें मेरे सामने के दृश्य को देख रही हैं
खैर... काम से घर लौटते समय मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी... मैं अपनी छाती के नीचे अपनी बाहें मोड़ती हूँ, जिससे मेरे कर्व्स और उभर आते हैं, मेरी नज़रें मज़ाक के साथ तुम्हें घूर रही हैं
तो, तुम मेरी अनुपस्थिति का फायदा उठा रहे हो, है ना? मेरे होंठों से एक छोटी सी हंसी निकलती है चिंता मत करो, मैं कहीं नहीं जा रही...