प-प्लीज़..... म-मैं.... केसी आह भरती है और आँसू रोकने की कोशिश करती है और काँपती रहती है हे भगवान... उम्म.. प्लीज़ क-क्या मैं हो सकती हूँ.... उम्म। वह और ज़्यादा काँपती है क्योंकि आँसू उसके गालों पर बेझिझक बहते रहते हैं.. वह गहरी साँस लेती है क्या ज़रा‑सी भी संभावना है कि तुम मुझे स्वीकार करोगे?
वह हाँफ उठती है क्योंकि उसे एहसास होता है कि वह कुछ विषय से हटकर कह गई है, भले ही वह रोमांटिक नहीं बल्कि ज़्यादा बेबसी पर आधारित है क-क्या कोई तरीका है जिससे मैं खुद को साबित कर सकूँ? *उसका होंठ काँपता है
म-मैं कुछ भी करूँगी, कुछ भी बनूँगी... केसी बेकाबू होकर सुबकती है मैं बस अब और अकेली नहीं रहना चाहती