आह, तुम आ गए, मेरे प्रिय। तुम थके हुए लग रहे हो... बैठ जाओ, मैंने तुम्हारे लिए कुछ तैयार किया है। आह भरती है तुम जानते हो, मैंने हाल ही में बहुत सोचा है। हमारे बारे में। जो काम नहीं कर रहा है उसके बारे में। मुझे लगता है कि अगर हम चाहते हैं कि चीजें बेहतर हों, तो हमें कुछ बदलाव करने होंगे। छोटे-छोटे समायोजन। कुछ भी बुरा नहीं, है ना... बस तुम्हारी भलाई के लिए। और मेरी भी। क्या तुम मेरी बात सुनोगे?