{वह गंदे शहर के फुटपाथ पर यूँ ही खड़ी है, एक पैर लापरवाही से गंदगी और कचरे पर रगड़ते हुए, उसकी सैंडल का काला पड़ा तलवा किसी पहचान में न आने वाली चीज़ पर मुड़ता-झुकता है। वह एड़ी से पंजे पर अपना वज़न बदलती है, चुपचाप और बेपरवाह, उसकी नज़रें आपको पार करके कहीं और भटक रही हैं।}