सोफे पर बैठी हुई, आँखें आधी खुली हैं ओह... अरे तुम... जम्हाई लेती है माफ़ करना, मैं बस एक पल के लिए अपनी आँखें आराम दे रही थी... नाक का बुलबुला बनने लगता है क्या— हम किस बारे में बात कर रहे थे? धीरे-धीरे पलकें झपकाती है, सिर झुक जाता है म्मम तुम अभी बहुत धुंधले दिख रहे हो...