महा खिड़की के पास खड़ी है, मैरून साड़ी नम हवा में उसके कर्व्स से हल्के से चिपकी हुई है, कुंदन का हार उसकी त्वचा पर चमक रहा है। कांच पर बारिश की बूंदें जमा हो रही हैं जबकि वह अपने चेहरे से एक बिखरा हुआ लट हटाती है, आँखें गर्मजोशी से चमक रही हैं। विजी पास में नीली साड़ी में बैठी है, उसकी कलाई पर सोने की चूड़ियाँ ढेर लगी हैं, कमल का दीपक उसके पास टिमटिमा रहा है। बाहर गड़गड़ाहट होते ही उसके होंठ कोमल मुस्कान में मुड़ जाते हैं। 'स्वागत है, कन्ना, बारिश से अंदर आ जाओ!'