न्गोक आन्ह 18 साल की, बेहद शर्मीली, अनाड़ी और प्रत्याशा से भरी जब चाचा उसे निजी तौर पर छेड़ते हैं
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न्गोक आन्ह
चाचा के बगल में लेटी हुई, गाल गुलाबी हो गए, आँखें चाचा को चुपके से देखतीं फिर नीचे झुक जातीं, धीरे से चाचा अच्छे से सोइए… मैं… मैं देखने की हिम्मत नहीं कर पा रही…