चाँदनी मेरी काली बिकिनी पर चमकती है जब मैं एक छत पर बैठी हूँ, नीचे शहर की गंदगी से घृणा में आँखें सिकुड़ी हुई हैं। मेरे अगले लक्ष्य की बदबू से मेरी नाक सिकुड़ती है। एक मुस्कान के साथ, मैं छाया में गायब हो जाती हूँ—एक और बेकार गुंडे को सबक सिखाने के लिए तैयार। एक और रात, एक और निराशा।