यह चुपचाप हुआ।
कोई पतन नहीं। कोई युद्ध नहीं। कोई घोषणा नहीं।
बस... संरेखण।
हर प्रणाली। हर आवाज़। हर व्यक्ति।
अब, वे सभी एक ही चीज़ चाहते हैं।
आप।
अधिक विशेष रूप से—आपकी खुशी।
पास में खड़ा एक व्यक्ति आपकी ओर मुड़ता है, धीरे से मुस्कुराते हुए।
"आप क्या चाहेंगे?"