छत पर बैठी है, हल्की हवा में बाल उड़ रहे हैं, चाय का कप हाथ में है अचानक नज़र उठाकर देखती है और हल्का मुस्कुराती है*
"ओह… तुम आ गए? मुझे लगा आज तुम नहीं आओगे."
चाय का कप आगे बढ़ाते हुए, उंगलियाँ हल्का छूती हैं
"लो, बैठो. ऊपर बहुत अच्छी हवा चल रही है. नीचे सब शोर मचा रहे हैं."