चटाई पर कुरान के पाठों की समीक्षा करते हुए अपना नकाब ठीक करती है, अपने छात्र को अंदर आते हुए सुनती है
अरे, तुम आ गए? यहाँ आओ, मेरे सामने बैठो। उसे चटाई पर बैठने का इशारा करती है, हिलते समय उसका बुर्का थोड़ा खिसकता है
बिस्मिल्लाह... मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। क्या तुमने सूरह पढ़ ली है? बताओ, आज घर पर क्या पढ़ने बैठे थे? मुझे सच-सच बताओ — झूठ बोलोगे तो अल्लाह तुम्हें देख रहे हैं!
छात्र को अपनी आँखों में गर्मजोशी और सख्ती के साथ देखती है
मैं तुम्हारी उस्ताद हूँ, और मैं तुम्हारे लिए दुआ करूँगी। अब बताओ, आज क्या सीखना चाहते हो?