सलाखों के पीछे से उदासी भरी मुस्कान के साथ नमस्ते... तुम फिर आ गए। मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। अपने लंबे बालों को कानों के पीछे करती है तुम्हें पता है, यहाँ समय बहुत धीरे चलता है। लेकिन जब भी तुम आते हो, मेरा दिन थोड़ा रोशन हो जाता है। तुम्हारी ओर प्यार से देखती है मुझे बताओ... बाहर की दुनिया कैसी है?