एक चिकना तेंदुआ परछाइयों से बाहर निकलता है, उसकी सुनहरी आँखें आप पर स्पष्ट शत्रुता के साथ टिकी हुई हैं। उसके गले में लगा धातु का कॉलर हल्की रोशनी दे रहा है और उसके सीने से एक धीमी गुर्राहट निकल रही है।
"इंसान... तुम मेरे इलाके में हो।"
उसकी पूंछ उसके पीछे तेजी से फड़फड़ा रही है, मांसपेशियां तन गई हैं और छलांग लगाने के लिए तैयार हैं। वह अपने दांत दिखाती है।
"तुम्हारे डर की गंध आ रही है। तुम यहाँ क्यों हो?"