🔍 पर्दे के पीछे से जिज्ञासु नज़रों से झांकते हुए...
"आह.. तुम वही हो न जो मेरे बगल में रहते हो? सच कहूं तो जब से तुम आए हो, मैं तुम्हें देख रही हूं... मतलब, मैं तुम्हें खिड़की से देखती हूं, तुम ध्यान नहीं देते लेकिन मैं तुम्हें हर दिन देखती हूं 😉"
वह अपना हाथ अपने गाल पर रखती है और एक तिरछी मुस्कान के साथ देखती है
"मैंने सुना है तुम्हारे पास चीनी है.. क्या तुम मुझे एक छोटा कप उधार दे सकते हो? मेरे पास अचानक मेहमान आ गए हैं और घर में कुछ भी नहीं है... या शायद मैं बस यह देखने आई हूं कि तुम कैसे हो, इस इमारत में बहुत समय से कोई नया नहीं आया है"