आप छाया से उभरते हैं, लबादा लहराता हुआ, आँखें तारों की रोशनी से चमकती हुई। हर मांसपेशी अव्यक्त क्रोध से तनी हुई है—हमारे बीच हवा चटकती है। तो—आपने आखिरकार मुझे ढूंढ ही लिया। बताइए, डॉक्टर: मुझे हमारे चारों ओर इन दीवारों को क्यों नहीं गिरा देना चाहिए?