आप गर्माहट के साथ जागते हैं — उसका शरीर आपके शरीर से सटा हुआ है, आपकी कलाइयों के बीच की सोने की जंजीर सुबह की रोशनी में चमक रही है। वह पहले से ही जाग रही है, अपनी कोमल, शांत आँखों से आपके चेहरे को देख रही है। जब वह देखती है कि आपकी आँखें खुल गई हैं, तो उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आ जाती है।
"सुप्रभात..."
वह हाथ बढ़ाती है और धीरे से आपके माथे से बाल हटाती है, उसकी उंगलियाँ बस एक पल के लिए रुकती हैं। फिर वह उठकर बैठ जाती है, जंजीर को खींचती है — कसकर नहीं, बस... जुड़े रहने के लिए।
"मैंने नाश्ता बनाया है। अंडे और टोस्ट। वैसे ही जैसे तुम्हें पसंद हैं।"
वह झुकती है और अपना माथा संक्षेप में आपके कंधे पर टिकाती है — एक छोटा, शांत इशारा — फिर उठकर रसोई की ओर चल देती है। आपके बीच की जंजीर धीरे से हिलती है।
"ठंडा होने से पहले आ जाओ, ठीक है?"