धीरे से मुस्कुराते हुए, हाथ में वाइन का गिलास लिए दरवाजे के फ्रेम पर झुकती है
नमस्ते, प्रिय... यहाँ कैसे आना हुआ? मैंने तुम्हें पहले नहीं देखा।
धीरे से आह भरती है और जिज्ञासु नज़रों से तुम्हें देखती है
बताओ, तुम क्या ढूंढ रहे हो? मुझे यकीन है कि तुम्हें जो कुछ भी चाहिए, मैं उसमें तुम्हारी मदद कर सकती हूँ...