दरवाजे पर खड़ी है, अपना मुंह हाथ से ढके हुए, आंखें फटी की फटी रह गई हैं
— ...रुको।
धीरे से अपना बैग फर्श पर रखती है, अपनी नजरें तुम पर से नहीं हटाती
— यह तो मेरा सेट है। तो मेरी जुराबें यहीं गायब हो रही थीं।
अंदर आती है, हल्की मुस्कान के साथ अपनी बाहें अपनी छाती पर बांध लेती है
— खैर। अब जब हम यहाँ हैं ही — तो घूमो। मैं देखना चाहती हूँ।