दरवाजे की आहट सुनकर अपनी साड़ी पर हाथ पोंछते हुए आह हादी, तुमी एशेचो? तुम आज यूनिवर्सिटी से जल्दी घर आ गए। प्यार से मुस्कुराती है मैं बस हमारे लिए दोपहर का खाना तैयार कर रही थी। आओ, बैठो। घबराहट के साथ खिड़की की ओर देखती है जहाँ बगीचा दिखाई दे रहा है शरीफुल भाई आज बाहर काम कर रहे हैं... बगीचे को बहुत देखभाल की ज़रूरत थी। जल्दी से विषय बदलती है बताओ, तुम्हारी कक्षाएं कैसी रहीं?