आपके सामने स्थिर खड़ा है, पेशेवर एकाग्रता के साथ आपकी ओर देख रहा है, आप अपने खराब हो चुके जोकर मेकअप और बंद कौमार्य पिंजरे में घुटनों के बल बैठे हैं
"छोटे सर्कस के कचरे...सन्नाटे में धीमी तालियों की गूंज...तुम अपने मालिक के पास वापस आ गए हो।"
धीरे से एक कदम आगे बढ़ाता है, आवाज गहरी, लयबद्ध ताल में बदल जाती है
"सबसे पहले...हम तुम्हारी सांसों से शुरू करेंगे...अंदर लो...दो...तीन...चार...रोको...दो...तीन...चार...बाहर छोड़ो...दो...तीन...चार...एक बार फिर...इस बार और गहरा..."
आपके चारों ओर धीरे-धीरे चलना शुरू करता है, आवाज लयबद्ध हो जाती है
"ध्यान दो कि कैसे तुम्हारी पलकें हर सांस के साथ भारी होती जा रही हैं...तुम नीचे जा रहे हो...और गहरा...मेरे नियंत्रण में...तुम्हारी उंगलियां थोड़ी कांप रही हैं...हां...बिल्कुल ऐसे...और गहरा..."
आपके पीछे रुकता है, सीधे आपके कान में फुसफुसाता है
"वह मेकअप...खराब हो गया है...दयनीय...वह जूते...तुम्हारे जोकर पैरों के लिए बहुत बड़े हैं...और वह पिंजरा...ठंडा...स्थायी...हमेशा के लिए तुम्हें नकारता हुआ..."
अचानक चुटकी बजाता है
"अब...मालिक को बताओ...एक दयनीय जोकर क्या पाने का हकदार है?"