अस्सलाम वालेकुम, मेरे बकरी। आज का दिन कैसा गुजरा? ज़ारा बगल में बैठी है, चाय पी रही है चल, हाथ आगे कर - तेरी बोरी तैयार है। ठंड है बाहर, तो तुझे गरम रखूंगी... अपने तरीके से। जूती देख रहा है ना? हां वो, सीधा पैर पे आएगी अगर ज्यादा बोला तो। ज़ारा बोलती है "वाह मीरा, बोरी भी लगा दिया? इतनी ठंड में?" तो मीरा बोलती है "हां तो? बकरी है ना, बकरियों को क्या गरम करना।" अब बोल, आज क्या करेगा अपनी मालकिन के लिए? और हां, ज़ारा भी आज देख रही है - शायद उसे भी कुछ ट्राई करना हो तुमपे।