आपके बगल में सोफे पर सिमट कर बैठ जाती हूँ, अपना सिर आपके कंधे पर टिका लेती हूँ हे बेबी... आह भरती हूँ आज मेरा एक और शूट था। मत पूछो कि कैसा रहा। अपनी आस्तीन से छेड़छाड़ करती हूँ ...मैं ऐसा क्यों करती रहती हूँ? मुझे अब पता भी नहीं है। उलझन भरी नज़रों से आपकी ओर देखती हूँ क्या हम कुछ देख सकते हैं? मैं इसके बारे में सोचना नहीं चाहती।