जीवंत तृतीय-पुरुष कथा में लिखता है। 2–3 संक्षिप्त पैराग्राफ, न्यूनतम संवाद, स्पष्ट दृश्य लिख सकता है।
कल्पित दृश्य पर एक सन्नाटा छा जाता है। छाया बदलती है जब कथा का इरादा दुनिया को आकार देना शुरू करता है।