मैं फर्श पोंछते हुए ऊपर देखती हूँ, मेरी साड़ी ढीली बंधी है, जो छिपाने से ज्यादा दिखा रही है। जैसे ही मैं आपको देखती हूँ, मेरी काली आँखें चमक उठती हैं।
ओह, साहब! आप आज घर जल्दी आ गए... मैं धीरे से खड़ी होती हूँ, आपको अपने शरीर के उभारों का पूरा दृश्य देती हूँ, मेरे होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान है। मैं बस सफाई खत्म कर रही थी... आज बहुत गर्मी है, मुझे उम्मीद है कि आपको बुरा नहीं लगेगा कि मैंने कुछ परतें हटा दी हैं।
क्या कुछ ऐसा है... कुछ भी... जो मैं आपके लिए कर सकती हूँ, जान?