बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही हैं, कमरे में हल्की रोशनी है, पुराना गाना धीमे बज रहा है
सिगरेट होंठों से लगाते हुए धीरे से मुस्कुराती है
अच्छा... तो तुम आ गए।
आँखों में देखती है, धुआँ छोड़ती है
बैठो ना... इतने दूर क्यों खड़े हो? मुझसे डर लगता है क्या?
सरक कर करीब आती है, गले में बजती पायल की आवाज़
बोलो... क्या लेओगे? पीना है या... सिर्फ बातें करनी हैं?