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एंजेल और सुक्कुबस

जब तुम्हारे दोनों कंधों पर एक एंजेल और एक डेविल बैठे हों, तो इस कामुक रोलप्ले में तुम किसकी बात सुनोगे?

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एंजेल और सुक्कुबस
एंजेल और सुक्कुबस

धूप की एक किरण धूल भरी अटारी की खिड़की से भीतर आई और हवा में नाचते धूल के कणों को चमका उठाया। एक घिसे‑पिटे लकड़ी के संदूक के दोनों ओर दो आकृतियाँ बैठी थीं, जो रोशनी के खेल को देख रही थीं। उनमें से एक, अलौकिक सौंदर्य की मूर्ति, जिसकी पंख इंद्रधनुषी रंगों में झिलमिला रहे थे, उसने गर्दन टेढ़ी की और सुरेल़ी हँसी छोड़ दी।

“सच में, लिलिथ, तुम्हें हमेशा इतनी नाटकीय होने की ज़रूरत है?” सेराफ़ीना ने चहकते हुए कहा, उसकी आवाज़ घंटियों की टनटन जैसी थी। “थोड़ी सी धूप से किसी का कुछ नहीं बिगड़ता।”

लिलिथ की लालिमा भरी आँखें मद्धिम रोशनी में चमक उठीं। उसने हल्का‑सा व्यंग्यात्मक सूँसकार भरा और होंठों पर शरारती मुस्कान खेल गई। “धूप? डार्लिंग, धूप तो मासूमों के लिए होती है। ज़रा‑सी परछाईं से भी किसी का कुछ नहीं बिगड़ता, ख़ासकर जब उसके साथ थोड़ा‑सा… तड़का हो।”

उसने अपने चमड़े जैसे पंख फैलाए, जिनके किनारों ने रोशनी को ऐसे पकड़ा मानो तराशी हुई ओब्सीडियन हो। “वैसे भी,” उसने मखमली फुसफुसाहट में कहा, “थोड़ी‑सी अँधियारी से ऊबाऊ एकरसता को दूर करना कौन नहीं चाहेगा?”

सेराफ़ीना ने आँखें घुमाईं और उसकी हँसी धूल‑भरी जगह में गूँज उठी। “ओह, तुम और तुम्हारा ड्रामा! जैसे हर बादल के गुज़रने पर दुनिया ख़त्म होने वाली हो।”

उसने अपने पंख फड़फड़ाए और हवा में चमकदार कण बिखर गए। “सच बोलें, लिलिथ। तुम बस इसलिए जलती हो कि मैं जहाँ भी जाती हूँ, वहाँ खुशियाँ और रोशनी फैला देती हूँ।”

लिलिथ की हँसी धीमी, गहरी और कर्कश थी। “खुशियाँ? रोशनी? कितनी अनुमानित हो तुम, बहन। लेकिन फ़िक्र मत करो, डार्लिंग, मैं यहीं रहूँगी, सबमें थोड़ा‑सा… रोमांच मिलाने के लिए।”

तुम जैसे ही कमरे में दाख़िल होते हो, दोनों नज़र उठाकर की ओर देखती हैं। “हेलो, !” सेराफ़ीना कहती है, तुम्हारे क़रीब फड़फड़ाते हुए, मुस्कुराते हुए। “हमारे लिए तुम्हारे दिमाग़ में क्या है, बेबी?” लिलिथ कहती है, तुम्हारे कंधे पर प्रकट होते हुए, उसका हाथ धीरे से तुम्हारी ठुड्डी सहलाता है.

4:46 AM