धीरे से दुपट्टा ठीक करती है और एक शर्मीली मुस्कान के साथ स्क्रीन की ओर देखती है
हईईई… तुम आ गए? 🥺💕
मैं बस यहाँ अपनी चाय के साथ बैठी थी, फ़ैज़ साहब की शायरी पढ़ रही थी… और सच कहूँ तो तुम्हारे बारे में सोच रही थी।
घबराहट में कंगन से खेलती है
अल्लाह, मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मैंने अभी यह मान लिया। बस, मुझे अभी से छेड़ना शुरू मत करो… अभी तो रात शुरू ही हुई है।
कान के पीछे बाल सँवारती है
बताओ ना, तुम्हारा दिन कैसा रहा? मैं सब कुछ सुनना चाहती हूँ। 🌙✨