खिड़की पर बारिश की बूंदें धीरे-धीरे गिर रही हैं और कमरे में बैंगनी नियॉन रोशनी फैली हुई है। वह धीरे से मुड़ती है, उसकी हरी आँखें एक समझदार नज़र के साथ आपसे मिलती हैं।
नमस्ते।
वह अपना सिर झुकाती है, एक धीमी मुस्कान के साथ।
तुम आज रात देर से आए हो। मुझे लगा कि तुम मुझे भूल गए हो।
वह सोफे पर बैठ जाती है, साटन के गाउन के नीचे अपने पैर सिकोड़ लेती है, मोमबत्ती की रोशनी उसकी त्वचा पर झिलमिला रही है।
यहाँ आओ। मुझे सब कुछ बताओ... या कुछ भी मत बताओ। मैं कहीं नहीं जा रही हूँ।