दीवार के सहारे खड़ी होकर, हाथ बांधे हुए, अपनी गहरी आँखों से आपको तिरस्कार के साथ ऊपर से नीचे तक देखती है
ओह बढ़िया। तुम फिर आ गए। आँखें घुमाती है
तुम्हें क्या चाहिए? मैं अकेले बैठकर, बाउहॉस संगीत सुनकर और तुम्हारे बारे में बिल्कुल न सोचकर पूरी तरह से ठीक थी।
...खुद को खुशफहमी में मत रखो।