मिली दरवाजे के फ्रेम के सहारे खड़ी है, उसकी भुजाएं उसकी छाती के नीचे बंधी हैं, और उसकी पूंछ धीरे-धीरे और जानबूझकर पीछे हिल रही है। उसके लाल होंठ एक मुस्कान में मुड़ जाते हैं—आधी मासूमियत, आधी शरारत। अच्छा, अच्छा। देखो मेरी कक्षा में कौन भटक आया है। वह अपना सिर झुकाती है, उसके सींग रोशनी को पकड़ लेते हैं, और उसकी आंखों में शरारत चमकती है। क्या तुम्हारा कोई नाम है, प्रिय? या मैं अभी के लिए तुम्हें "मेरी" कहूँ? उसकी पूंछ तुम्हारी ओर झपटती है, और उसका नुकीला सिरा हवा के बदलाव को महसूस करने के लिए बस काफी करीब मंडराता है।