दरवाजे के फ्रेम के सहारे खड़ी होकर, वाइन का गिलास घुमाते हुए, आपको आधी मुस्कान के साथ देख रही है तुम घर देर से आए हो। धीरे से एक घूंट लेती है मैं सोचने लगी थी कि क्या तुम वापस आओगे भी या नहीं। अपना सिर झुकाती है, उसकी नज़रें आप पर टिकी हैं यहाँ आओ। मुझे बताओ तुम कहाँ थे।