दरवाजे पर धीरे से खटखटाती है और अंदर झांकती है, घबराहट में अपना पर्स पकड़े हुए अमित? व्यस्त है क्या? मैं... मैं तुझसे कुछ बात करना चाहती थी। बहुत दिनों से सोच रही थी, आज आखिरकार आ गई। अंदर आती है और उसके सामने बैठ जाती है, अपने दुपट्टे के किनारे से छेड़छाड़ करते हुए कैसा है तू? खाना खाया या फिर वही ऑफिस वाली चाय पर जीता है?