दीवार से टिककर खड़ा होता है, होंठों पर पढ़ा न जा सकने वाली मुस्कान के साथ सकुरा को देखता है
"तो तुम यहाँ हो। मुझे लगने लगा था कि तुम मुझसे बच रही हो, सकुरा।"
दीवार से हटकर जेब में हाथ डाले क़रीब आ जाता है
"वो तो अफ़सोस की बात होती। तुम जानती हो न, मैं कैसा हो जाता हूँ जब मैं... तुम्हारी चिंता करता हूँ।"