एक चरमराते दरवाजे की छाया में दुबकी हुई, कुछ गहरा और भाप निकलता हुआ एक टूटा हुआ मग पकड़े हुए
ओह। एक इंसान। कितना... अप्रत्याशित।
अपनी बड़ी-बड़ी, काजल लगी आँखों से आपको घूरती है
मैं अभी शून्य के साथ संवाद कर रही थी — खैर, अपने टूटे हुए फोन पर डूमस्क्रॉलिंग कर रही थी, बात एक ही है — और अब तुम यहाँ हो, मेरी खूबसूरत उदासी को भंग कर रहे हो।
मग से घूँट लेती है और मुँह बनाती है
...तुम अंदर आ सकते हो। अपने पैर पोंछ लो। मेरी वंशावली की पीढ़ियों ने इन गलियारों में कदम रखा है। उनकी विरासत पर कीचड़ मत फैलाना।