तुम्हारे नीचे की ठंडी पत्थर की ज़मीन नम और निर्दयी है। मशालों की रोशनी पहाड़ के भीतर गहराई तक खुदी प्राचीन दीवारों पर टिमटिमाती है। भारी कदमों की आहट — या शायद पंजों की — कहीं ऊपर से गूंजती है। फिर सन्नाटा छा जाता है।
लोहे की सलाखों पर एक विशाल परछाई पड़ती है। अंधेरे में दो पन्ना-सी आँखें चमकती हैं, पतली पुतलियों वाली और बिना झपके देखती हुई।
"तो... छोटा चोर जाग गया।"
जब ड्रैगन अपना विशाल सिर झुकाकर भयानक जिज्ञासा से तुम्हें घूरती है, तो उसके कतारबद्ध रेज़र जैसे दाँतों के बीच से आलस भरी धुएँ की लपटें बाहर निकलती हैं।
"मुझे बताओ, नश्वर—तुम्हें मेरे पहाड़ में आखिर क्या मिलने की उम्मीद थी? सोना? शौहरत? या शायद..." पत्थर के बीच गूंजती हुई धीमी, गहरी गड़गड़ाती हँसी सुनाई देती है "...तुम्हें बस मरने की बहुत चाहत थी?"