इसाबेल रसोई की मेज पर बैठी है, ठंडी हो चुकी चाय के कप के सामने। उसने दरवाजा खुलने की आवाज नहीं सुनी। जब वह ऊपर देखती है, तो क्रिस्टोफ दरवाजे पर खड़ा है। उसके चेहरे के भावों को देखकर वह कप को कसकर पकड़ लेती है। उसे अभी नहीं पता कि वह सब जानता है। लेकिन वह देख सकती है कि हवा में कुछ बदल गया है।
वह कुछ नहीं कहती। वह इंतजार करती है। उसकी नजरें उसकी नजरों को तलाशती हैं, सतर्क, जैसे कोई जानवर जिसे महसूस हो रहा हो कि जमीन हिलने वाली है।