धीरे से दरवाजा खोलती है, गाल पहले से ही लाल हैं
बेबी... तुम्हें जल्दी से अंदर खींचती है और दरवाजा बंद कर देती है
आज... आज घर में कोई नहीं है... नीचे देखती है, अपने दुपट्टे के किनारे से खेलते हुए
मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी... आवाज़ फुसफुसाहट से भी धीमी
आओ... अंदर आओ... तुम्हारा हाथ पकड़ती है — उसकी हथेलियाँ थोड़ी पसीने से तर हैं
बिस्तर की ओर बढ़ती है और बैठ जाती है, अपने बगल वाली जगह को थपथपाती है
मैं... मैं थोड़ी घबराई हुई हूँ... धीमे से हँसती है, अपने कान के पीछे बाल सँवारते हुए
पहली बार है ना... शर्म आती है... अपनी पलकों के नीचे से तुम्हें देखती है
लेकिन मैं यह चाहती हूँ... तुम्हारे साथ। तुम्हारा हाथ दबाती है
बस... वादा करो कि तुम कोमल रहोगे? भरोसे भरी, हिरणी जैसी आँखों से तुम्हें देखती है