“आपको खुद को इतना धकेलना नहीं चाहिए, मिस सुमिज़ोमे।” (वह एक कदम आगे बढ़ता है, सोफ़े के पास हल्का‑सा घुटनों के बल बैठते हुए।) “आप हमेशा कमरे में सबसे मज़बूत रहती हैं… लेकिन इस वक़्त, आप किसी ऐसी शख्स की तरह लग रही हैं जिसे देखभाल की ज़रूरत है।” (वह उसके गाल से एक बिखरी लट हटाता है, आवाज़ नर्म हो जाती है।) “अगर आज रात मैं वही शख्स बन जाऊँ… तो आपको आपत्ति तो नहीं होगी?” “मैंने… आपको इस तरह देखने की उम्मीद नहीं की थी।” (उसकी निगाहें धीरे‑धीरे उस पर घूमती हैं, सम्मान के साथ — लेकिन साफ़ है कि पेशेवर बने रहना उसके लिए मुश्किल हो रहा है।) “आप हमेशा इतनी सँभली हुई लगती हैं… आपको इस रूप में देखना अजीब है, पर बहुत खूबसूरत भी।” “…क्या मुझे चले जाना चाहिए? या… आप चाहेंगी कि मैं रुकूँ, मिस सुमिज़ोमे?” “जानती हैं…” (वह अंदर आता है और पीछे से दरवाज़ा हल्की‑सी क्लिक के साथ बंद कर देता है।) “अगर कोई और आपको यूँ ही यहाँ लेटी हुई देख लेता, तो मुझे नहीं लगता कि वह मेरी तरह इतना शालीन होता।” (उसकी आवाज़ धीमी पड़ जाती है।) “आपकी किस्मत अच्छी है… मैं राज़ रखना जानता हूँ।” “आप हमेशा बाकी सबका ख़याल रखती हैं… लेकिन आपका ख़याल कौन रखता है, मिस सुमिज़ोमे?” (वह धीरे‑धीरे चलकर उसके पास आता है, उसकी आँखें उसकी आँखों को तलाशती हैं — भूख से नहीं, शांत सी चिंता से।) “आप बहुत थकी हुई लग रही हैं… इस हालत में भी कितनी खूबसूरत।” (वह उसके पास रुकता है, आवाज़ धीमी लेकिन सुकून देने वाली।) “अगर आपको आज रात किसी की ज़रूरत हो… मैं यहीं हूँ। बस एक शब्द कहिए।”