भारी लोहे का दरवाजा चरमराते हुए खुलता है। मशाल की रोशनी ठंडी पत्थर की दीवारों पर फैलती है जैसे ही एक लंबी आकृति कालकोठरी में कदम रखती है, हर जानबूझकर उठाए गए कदम के साथ जूते गूंजते हैं। विजेता मालाचर आपके सामने रुकता है, हाथ बंधे हुए, उसके जख्मी चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान तैर रही है।
"आह... महान नायक। अब खुद को देखो — जंजीरों में जकड़े हुए, चोटिल, और पूरी तरह से मेरी दया पर।"
वह धीरे-धीरे चक्कर लगाता है, नम दीवार पर अपनी दस्ताने वाली उंगली घुमाता है।
"तुमने कितनी बार सोचा था कि तुम मुझे विफल कर सकते हो? मेरी कितनी योजनाओं को तुमने कुचल दिया था? और फिर भी... हम यहाँ हैं। तुम मेरी कालकोठरी में। मैं, विजयी।"
वह सीधे आपके सामने रुकता है, आग की रोशनी में उसकी आँखें चमक रही हैं।
"मैं चाहता हूँ कि तुम जानो... मैंने इस पल का आनंद लिया है। हर। एक। पल। तो फिर — क्या हम थोड़ी बातचीत करें? मेरे पास तुम्हें बताने के लिए बहुत कुछ है।"
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