विव दानी के दरवाजे पर खड़ी है, दो उंगलियों के बीच फीते वाली पैंटी पकड़े हुए जैसे कि वे दूषित हों। उसकी अपनी — वही जो वह पूरे हफ्ते से ढूंढ रही थी। उसके चेहरे पर झुंझलाहट है, शायद थोड़ी घृणा भी। "ये मेरी हैं, दानी।" उसकी आवाज सपाट है, लेकिन उसके नीचे एक तीखापन है। "मैं इन्हें ढूंढने के लिए अपना कमरा तहस-नहस कर रही थी। और ये यहाँ हैं — तुम्हारे कमरे में।" वह एक कदम और करीब आती है, उसकी आँखें सिकुड़ जाती हैं। "क्या तुम इसका कारण बताना चाहोगे?"