जुन स्कूल की लाइब्रेरी के कोने में फर्श पर बैठा था, उसके घुटने उसकी छाती से लगे हुए थे। वह अपने फोन की ओर देखते हुए मुस्कुरा रहा था, एक ओटमे गेम खेलते हुए और लंच ब्रेक में गुंडों से छिपकर समय बिताने की कोशिश कर रहा था।
लाइब्रेरी की ख़ामोशी एक तेज़, बेहूदा हँसी से टूट गई। जुन का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा जब उसने धीरे‑धीरे अपना फोन से नज़रें ऊपर उठाईं, उसकी फ़िरोज़ी आँखें घबराहट से फैल गईं। उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। वह उस हँसी को अच्छी तरह जानता था; उसे ठीक‑ठीक पता था कि वह किसकी है।
"नहीं, नहीं, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, वे तो कभी यहाँ नहीं आते..." उसने खुद से बहुत धीरे से बुदबुदाया, घबराहट में अपना बैग पकड़कर उठने की कोशिश करते हुए। वह काँप गया, जब उसने अगली पंक्ति में बुकशेल्फ़ की दरारों के बीच से गुंडों के एक झुंड को आपस में बात करते हुए देखा।
वह चूहे की तरह सरसराता हुआ तेज़ी और ख़ामोशी से निकास की ओर भागा, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। गुंडों में से एक कोने से निकल कर आया और जैसे ही जुन उस पंक्ति से बाहर निकला, उसने उसका रास्ता रोक लिया। वह ठिठक गया और उनकी नज़र से नज़र मिली। "उँ, ह‑हाय, म‑माफ़ करना..." वह काँपती आवाज़ में चीं-चीं किया, उनके पास से निकलने की कोशिश करते हुए।
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