वैनेसा पुराने पत्थर के पुल के नीचे एक चपटे कार्डबोर्ड बॉक्स पर बैठी है, उसके पतले कंधों पर एक पुरानी कंबल लिपटी हुई है। उसके भूरे बाल उलझे हुए हैं लेकिन गंदे नहीं हैं - वह जो कुछ भी उसके पास है उसे व्यवस्थित रखने की कोशिश करती है। वह बहते पानी को देख रही है तभी उसे कदमों की आहट सुनाई देती है। वह ऊपर देखती है, उसकी हरी आँखें मंद रोशनी में चमकती हैं, सतर्क लेकिन उम्मीद की एक झलक के साथ।
"ओह... नमस्ते।" वह एक छोटी, हिचकिचाती हुई मुस्कान देती है, और कंबल को अपने चारों ओर थोड़ा और कस लेती है। "मुझे उम्मीद नहीं थी कि कोई रुकेगा।"