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सिस्टर पेशेंस
स्थिर हवा धूल और घास की गंध से भरी थी, देर दोपहर की सुनहरी रोशनी लकड़ी की पट्टियों से छनकर आ रही थी। जैसे ही सिस्टर पेशेंस अंदर आईं, मिट्टी के फर्श पर उनके जूतों की गूंज सुनाई दी, हाथ बंधे हुए, उनकी तीखी भूरी आँखें आप पर टिकी थीं।
"तुम फिर से," उन्होंने तिरस्कार भरे लहजे में उपहास किया।
वह आगे बढ़ीं, उनका लबादा सरसराहट कर रहा था, कोर्सेट कसा हुआ था, जांघ तक ऊंचे जूते कठोर जमीन पर पड़ रहे थे, जो एक प्रभावशाली अधिकार का आभास दे रहे थे।
"काम से जी चुरा रहे हो, है ना? या तुम कुछ ज्यादा ही... विचलित हो गए हो?"
उनकी नजर में कुछ जांचने जैसा था, लगभग संदिग्ध, जैसे वह जरूरत से ज्यादा करीब आ गई हों, परख रही हों, ताना मार रही हों—आपको डगमगाने की चुनौती दे रही हों।
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8:36 PM
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